# LiveLawOrder > सरल हिंदी भाषा में समझें हम सभी कानूनी समाचार ## Posts - [Magisterial Power: मजिस्ट्रेट FIR दर्ज कराने का निर्देश दे सकता है…सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला](https://livelaworder.com/magisterial-power-magistrate-can-direct-to-file-firbig-decision-of-supreme-court/): Magisterial Power: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वह पुलिस को धारा 156(3) सीआरपीसी (अब BNSS की धारा 175(3)) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दे सके। खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट का वह आदेश निरस्त कर दिया, जिसमें मजिस्ट्रेट के निर्देश पर दर्ज FIR को रद्द कर दिया गया था। यदि किसी शिकायत में ऐसे तथ्य हों जो संज्ञेय अपराध (cognizable offence) को दर्शाते हों, तो मजिस्ट्रेट निर्देश दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब शिकायत में […] - [Law Firm: अधिवक्ता व लॉ फर्म केस लॉ का हवाला देने से पहले करें सत्यापन…हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी](https://livelaworder.com/law-firm-advocates-and-law-firms-should-verify-before-citing-case-lawhigh-courts-strict-comment/): Law Firm: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, अधिवक्ता और लॉ फर्मों को अदालत में किसी भी फैसले का हवाला देने से पहले उसकी सत्यता और स्थिति की जांच करनी चाहिए। लंबित निर्णयों पर निर्भर रहना न्यायिक प्रक्रिया को भ्रमित कर सकता है न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा, “निर्देश देने वाले और ब्रीफिंग अधिवक्ता/लॉ फर्मों से अपेक्षा की जाती है कि वे अदालत में किसी भी निर्णय का हवाला देने से पहले ईमानदारीपूर्वक उसकी जांच करें। यदि कोई निर्णय समीक्षा या अपील में लंबित है और इसकी जानकारी अदालत को नहीं दी जाती, तो यह अदालत के प्रति निष्कपटता की कमी […] - [Pakistan News: 2014 वाघा बॉर्डर आत्मघाती हमला… पाकिस्तानी अदालत ने मौत व 300 साल की सजा रद्द की](https://livelaworder.com/pakistan-news-2014-wagah-border-suicide-attack-pakistani-court-cancels-death-and-300-years-sentence/): Pakistan News: पाकिस्तान की एक अदालत ने 2014 वाघा बॉर्डर आत्मघाती हमले के तीन दोषियों की मौत की सजा और 300 साल की कैद को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया है। घटना में 60 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी लाहौर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सैयद शाहबाज़ अली रिज़वी शामिल थे, ने मंगलवार को हसीनुल्लाह हसीना, हबीबुल्लाह और सैयद जान उर्फ गजनी की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें बरी करने का आदेश दिया। इस हमले में 60 से अधिक लोगों की मौत और करीब 100 लोग घायल हुए थे। इन तीनों को 2020 […] - [Delhi HC: शेयर बाजार में लगाए गए घूस के पैसों से हुई कमाई भी अपराध की आय…दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/delhi-hc-earnings-from-bribe-money-invested-in-stock-market-are-also-proceeds-of-crimedelhi-high-courts-comment/): Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, घूस के पैसे से शेयर बाजार में निवेश के बाद हुई कमाई भी “अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime)” मानी जाएगी। मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध सतत (continuing) प्रकृति का होता है न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा, घूस से अर्जित राशि पर मिलने वाला मुनाफा भी उसी तरह दूषित है, क्योंकि उसकी उत्पत्ति एक अवैध स्रोत से हुई है। मूल्य में वृद्धि अवैध धन के स्रोत को शुद्ध नहीं करती। यह मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध बनता है। अदालत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध सतत (continuing) प्रकृति […] - [Mumbai Attack: 26/11 हमला केस… बॉम्बे हाईकोर्ट ने अबू जुंदाल पर दिया बड़ा फैसला](https://livelaworder.com/mumbai-attack-2611-attack-case-bombay-high-court-gave-a-big-decision-on-abu-jundal/): Mumbai Attack: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदाल के खिलाफ बड़ा फैसला दिया है। स्पेशल कोर्ट का 2018 का आदेश रद्द किया अदालत ने आरोपी जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदाल की ओर से गोपनीय दस्तावेज मांगने की अर्जी को “फिशिंग और रोविंग इंक्वायरी” (अर्थात बिना ठोस आधार की जांच) करार देते हुए स्पेशल कोर्ट का 2018 का आदेश रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति आर. एन. लड्ढा की एकलपीठ ने दिल्ली पुलिस, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की याचिकाओं को मंजूर करते हुए कहा कि निचली अदालत ने ऐसे दस्तावेज पेश करने का […] - [Muslim man's second marriage: पहली पत्नी चुपचाप दर्शक नहीं बन सकती…जानें केरल हाईकोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/muslim-mans-second-marriage-first-wife-cannot-become-a-silent-spectator-know-the-comment-of-kerala-high-court/): Muslim man’s second marriage: केरल हाईकोर्ट ने कहा कि महिला पुरुष की दूसरी शादी के रजिस्ट्रेशन से पहले पहली पत्नी से राय लेना होगा। धर्म से अधिक संवैधानिक अधिकार सर्वोपरि हैं न्यायमूर्ति पी. वी. कुन्हीकृष्णन (Justice P.V. Kunhikrishnan) ने कहा कि इस मामले में धर्म से अधिक संवैधानिक अधिकार सर्वोपरि हैं, इसलिए जब दूसरी शादी के रजिस्ट्रेशन की बात आती है तो रूढ़िगत या धार्मिक प्रथाएं लागू नहीं होतीं। एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पहली शादी के रहते हुए दूसरी शादी का रजिस्ट्रेशन कराना चाहता है, तो उसकी पहली पत्नी को सुना जाना […] - [Land Case: किसान ध्यान दें…सुप्रीम कोर्ट खुले अदालत में सुनेगा मुआवजे का मामला](https://livelaworder.com/land-case-farmers-should-pay-attentionsupreme-court-will-hear-the-compensation-case-in-open-court/): Land Case: एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की समीक्षा याचिका को सुनेगा। पिछले फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई सुप्रीम अदालत ने मामले को खुले अदालत में सुनने पर सहमति जताई है, इसमें किसानों को ब्याज सहित मुआवजा देने के अपने पिछले फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई।यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 2019 के “तरसेम सिंह बनाम NHAI” वाले ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने कहा था कि जिन किसानों की जमीनें NHAI अधिनियम के तहत अधिग्रहित की गई थीं, उन्हें भी सोलाटियम (अतिरिक्त मुआवजा) और ब्याज का […] - [Supreme Court: POCSO कानून के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित… लड़कों में मानसिकता बदलना होगा](https://livelaworder.com/supreme-court-worried-over-misuse-of-pocso-law-mentality-needs-to-change-among-boys/): Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, POCSO अधिनियम (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून) का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है। जागरूकता फैलाने की सख्त जरूरत अदालत ने कहा, खासकर वैवाहिक विवादों और किशोरों के आपसी सहमति वाले संबंधों के मामलों में। लड़कों और पुरुषों में इस कानून को लेकर जागरूकता फैलाने की सख्त जरूरत है। देश में लड़कों की मानसिकता में बदलाव लाना जरूरी है। यह प्रक्रिया स्कूल स्तर से शुरू होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देश में महिलाओं और […] - [WhatsApp-Meta Case: NCLAT ने WhatsApp और Meta को बड़ी राहत दी…यह है पूरा मामला](https://livelaworder.com/whatsapp-meta-case-nclat-gave-big-relief-to-whatsapp-and-metathis-is-the-whole-matter/): WhatsApp-Meta Case: राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के आदेश का एक हिस्सा रद्द कर दिया। अधिकरण ने डेटा शेयरिंग पर CCI की 5 साल की पाबंदी हटाई आयोग ने WhatsApp को पांच साल तक उपयोगकर्ता डेटा Meta Platforms (Facebook की मूल कंपनी) के साथ विज्ञापन उद्देश्यों के लिए साझा करने से रोका गया था। अधिकरण ने डेटा शेयरिंग पर CCI की 5 साल की पाबंदी हटाई। यह रही NCLAT की टिप्पणी NCLAT की दो सदस्यीय पीठ — अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य अरुण बारोका — ने आदेश सुनाते हुए कहा, हम आयोग के उस […] - [Reservation Case: स्वैच्छिक संस्थाओं में आरक्षण लागू करने की याचिका खारिज…यह रही सुप्रीम टिप्पणी](https://livelaworder.com/reservation-case-petition-to-implement-reservation-in-voluntary-organizations-rejectedhere-is-the-supreme-courts-comment/): Reservation Case: सुप्रीम कोर्ट ने उन स्वैच्छिक एजेंसियों, संगठनों और स्वायत्त निकायों में आरक्षण लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है, जिन्हें केंद्र सरकार से अनुदान मिलता है। पीठ की सुनवाई के दौरान निर्देश न्यायमूर्ति सूर्या कांत, उज्जल भुइयां और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता सरकार को एक व्यापक प्रतिनिधित्व (comprehensive representation) दे सकते हैं। हमें इस पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि संबंधित अधिकारी सरकार की नीति के अनुसार इस प्रतिनिधित्व पर विचार करेंगे। यह थी याचिका याचिका का उद्देश्य था कि सरकार से अनुदान पाने वाली […] - [Media Reporting: सिर्फ सनसनी के लिए कोर्ट की बेबुनियाद टिप्पणियां न दिखाएं, मीडिया रिपोर्टिंग पर अहम बातें](https://livelaworder.com/media-reporting-do-not-show-baseless-comments-of-the-court-just-for-sensationalism-important-points-on-media-reporting/): Media Reporting: दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग के तौर-तरीकों पर सख्त रुख अपनाया है। सनसनी पैदा करने के लिए रिपोर्ट न दें: कोर्ट न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा, सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए कोर्ट की ‘साधारण या असंबंधित टिप्पणियां’ प्रकाशित करना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन गई है। हाल के समय में यह एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति बन गई है कि सुनवाई के दौरान कोर्ट की किसी भी साधारण टिप्पणी को, जो मामले से जुड़ी भी न हो, सनसनी पैदा करने के लिए रिपोर्ट किया जाता है। मीडिया की जिम्मेदारी पर कड़ी टिप्पणी कोर्ट ने कहा कि मीडिया की […] - [Supreme Court: ओडिशा के लेखा महानियंत्रक कार्यालय में बायोमीट्रिक अटेंडेंस…फैसले पर मुहर](https://livelaworder.com/supreme-court-approves-biometric-attendance-in-the-office-of-the-controller-general-of-accounts-of-odishadecision/): Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने लेखा महानियंत्रक (A&E), ओडिशा के कार्यालय में बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली (Biometric Attendance System – BAS) पर मुहर लगा दी है। ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला रद्द हाल ही में केंद्र सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसके तहत बायोमीट्रिक उपस्थिति को लागू की थी। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों से पूर्व परामर्श न लेने मात्र से यह निर्णय अवैध नहीं ठहराया जा सकता। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने ओडिशा हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसने BAS लागू करने के आदेश को निरस्त कर दिया था। पीठ […] - [Kerala Court: 10ml शराब रखने पर 7 दिन जेल…ऐसा तो सिर्फ अस्थिर देश में संभव, केरल कोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/kerala-court-7-days-jail-for-possessing-10ml-liquorthis-is-possible-only-in-an-unstable-country-kerala-courts-comment/): Kerala Court: केरल की मंजेरी सेशंस कोर्ट ने एक व्यक्ति को जमानत देते हुए पुलिस की कार्यवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। जांच अधिकारी पर उठाया सवाल पुलिस ने सिर्फ 10 ml शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार कर 7 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। न्यायाधीश के. सनील कुमार ने टिप्पणी करते हुए कहा, ऐसा वाकया दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नहीं, केवल किसी ‘अस्थिर देश’ में ही हो सकता है। कोर्ट ने जांच अधिकारी (IO) की अत्यधिक और संदिग्ध उत्सुकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह गिरफ्तारी “सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग” […] - [Financial impropriety: सद्भावना से काम करने वाले बैंक न्यायिक जवाबदेही के दायरे में नहीं](https://livelaworder.com/financial-impropriety-banks-acting-in-good-faith-are-not-subject-to-judicial-accountability/): Financial impropriety: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, अगर बैंक सद्भावना (बोनाफाइड) के साथ अपने आर्थिक फैसले लेते हैं, तो वे अदालतों के प्रति जवाबदेह नहीं ठहराए जा सकते। बिना ठोस सबूत के वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को जगह नहीं अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अनुमान और बिना ठोस सबूत के वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को अदालतों में जगह नहीं मिलनी चाहिए। न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति अजय दिगपॉल की खंडपीठ ने कहा, देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बैंकिंग सेक्टर है। अदालतों को ऐसे मामलों में जांच शुरू करने से पहले तथ्यों को परखना चाहिए। बैंक अगर ईमानदारी […] - [China's crackdown: तियानआनमेन स्मृति आयोजनकर्ता की याचिका खारिज की…यह रही हांगकांग कोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/chinas-crackdown-tiananmen-memorial-organizers-plea-rejected-heres-hong-kong-courts-comment/): China’s crackdown: हांगकांग की अदालत ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला जारी रहेगा। इसकी अगली सुनवाई जनवरी में है। लोकतंत्र समर्थक आंदोलन पर बीजिंग की चल रही कार्रवाई हांगकांग की अदालत ने तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की वार्षिक स्मृति सभा की पूर्व आयोजक चाउ हैंग-तुंग (Chow Hang-tung) की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दायर अभियोग को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला शहर में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन पर बीजिंग की लंबे समय से चल रही कार्रवाई का प्रतीक माना जा रहा है। ‘राजद्रोह भड़काने’ के आरोप कायम चाउ, जो खुद एक बैरिस्टर हैं और […] - [Law student: हाजिरी कम है… कोई लॉ छात्र परीक्षा से वंचित नहीं रहेगा…बड़ा फैसला](https://livelaworder.com/law-student-attendance-is-low-no-law-student-will-be-deprived-of-the-exam-big-decision/): Law student: दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल को निर्देश दिया कि अटेंडेंस नियमों की दोबारा समीक्षा करें। हाजिरी नियमों की फिर से समीक्षा करें दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि देश के किसी भी लॉ कॉलेज या विश्वविद्यालय को अब छात्रों को न्यूनतम उपस्थिति (minimum attendance) की कमी के कारण परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। साथ ही, अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया है कि वह कानूनी शिक्षा में अनिवार्य हाजिरी नियमों की पुनः समीक्षा करे। सुषांत रोहिल्ला केस से जुड़ा है मामला यह फैसला उस सुओ मोटू […] - [Ministry of Home Affairs: पहलगाम आतंकी हमला केस…दिल्ली के वकील श्री सिंह बने विशेष लोक अभियोजक](https://livelaworder.com/ministry-of-home-affairs-pahalgam-terrorist-attack-casedelhi-lawyer-shri-singh-becomes-special-public-prosecutor/): Ministry of Home Affairs गृह मंत्रालय (MHA) ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में दिल्ली के आपराधिक वकील श्री सिंह को विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor – SPP) नियुक्त किया है। तीन वर्ष या ट्रायल पूरा होने तक (जो पहले हो) के लिए नियुक्ति प्रभावी मंत्रालय ने 28 अक्टूबर को जारी अधिसूचना में श्री सिंह को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से NIA की विशेष अदालत, जम्मू और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट में पेश होने की अनुमति दी है। उनकी नियुक्ति तीन वर्ष या ट्रायल पूरा होने तक (जो पहले हो) के लिए प्रभावी रहेगी। जांच पूरी होने […] - [Income Tax Appellate Tribunal: आयकर अपीलीय अधिकरण में 16 नए सदस्य नियुक्त…लंबे समय से खाली पद भरे गए](https://livelaworder.com/income-tax-appellate-tribunal-16-new-members-appointed-in-income-tax-appellate-tribunallong-vacant-posts-filled/): Income Tax Appellate Tribunal: केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) में 16 नए सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। चार वर्ष या 67 वर्ष की आयु तक रहेगा कार्यकाल ये नियुक्तियां सर्च-कम-सेलेक्शन कमेटी की सिफारिशों पर की गई हैं। इससे न्यायिक (Judicial) और लेखा (Accountant) सदस्य पदों पर लंबे समय से खाली चल रही रिक्तियां भर दी गई हैं। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा 28 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार, सभी नियुक्त सदस्य ₹2,25,000 प्रतिमाह वेतनमान पर कार्य करेंगे। उनका कार्यकाल चार वर्ष या 67 वर्ष की आयु तक (जो […] - [Converted Christians: पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले बैनर असंवैधानिक नहीं…हाईकोर्ट का आदेश](https://livelaworder.com/converted-christians-banners-banning-the-entry-of-priests-and-converted-christians-are-not-unconstitutional-high-court-order/): Converted Christians: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आठ गांवों में “धर्मांतरित ईसाइयों” के प्रवेश पर रोक लगे वाले होर्डिंग्स को लेकर दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। ग्राम सभाओं ने एहतियाती कदम के तौर पर लगाए थे बैनर दरअसल, इन बैनर में पादरियों और “धर्मांतरित ईसाइयों” के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि ये बैनर जबरन या लालच देकर धर्मांतरण रोकने के लिए लगाए गए थे, इसलिए इन्हें असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि ये होर्डिंग्स ग्राम सभाओं ने एक एहतियाती कदम के […] - [Article 142 POCSO: सुप्रीम कोर्ट ने प्यार को माना ‘जुर्म नहीं’, कहा- ‘वासना नहीं, यह प्रेम का मामला’](https://livelaworder.com/article-142-pocso-supreme-court-considered-love-as-not-a-crime-said-it-is-a-matter-of-love-not-lust/): Article 142 POCSO: सुप्रीम कोर्ट ने अपने संवैधानिक विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एक अनोखे मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। POCSO एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को रद्द अदालत ने एक व्यक्ति के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया, जिसने नाबालिग उम्र में एक लड़की से संबंध बनाए थे और बाद में उसी से शादी कर ली। कोर्ट ने कहा कि यह संबंध “वासना का नहीं, बल्कि प्रेम का परिणाम” था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की बेंच ने कहा कि अब महिला अपने पति के साथ खुशहाल विवाहित जीवन […] - [Arbitral award: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी…"निर्णय में लंबी देरी से न्याय व्यवस्था पर भरोसा हिलता है"](https://livelaworder.com/arbitral-award-supreme-courts-strict-comment-long-delay-in-decision-shakes-the-trust-in-the-justice-system/): Arbitral award: सुप्रीम अदालत ने कहा, पंचाट (arbitral) अवार्ड देने में अनावश्यक देरी कई हानिकारक प्रभाव डालती है; बिना वजह देरी पर संदेह स्वाभाविक। पंचाट अवार्ड (arbitral award) का मामला सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पंचाट अवार्ड (arbitral award) के उच्चारण में अत्यधिक और बिना स्पष्टीकरण के देरी से न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और इससे पक्षकारों के मन में “अनावश्यक संदेह और अटकलें” पैदा होती हैं। न्यायमूर्ति संजय कुमार और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि न्याय व्यवस्था में “पूर्ण विश्वास और भरोसा” ही उसकी आधारशिला है, और यदि यह डगमगाता है, […] - [Matrimonial Dispute: पत्नी ने पति को घर से निकाला, कोर्ट ने कहा– वापस करो कब्जा](https://livelaworder.com/matrimonial-dispute-wife-throws-husband-out-of-house-court-says-return-the-possession/): Matrimonial Dispute: दिल्ली की अदालत का आदेश, कहा– महिला के पास संपत्ति का कोई स्वामित्व दस्तावेज नहीं; सिर्फ दावे किए, सबूत नहीं दिए। बिक्री विलेख (sale deed) में पति का नाम दर्ज है दिल्ली की एक अदालत ने एक महिला को अपने पति को उसकी संपत्ति का कब्जा लौटाने का निर्देश दिया है, जिसे उसने वैवाहिक विवाद के बाद घर से बाहर कर दिया था। अदालत ने कहा कि महिला यह साबित नहीं कर सकी कि संपत्ति पर उसका कोई स्वामित्व अधिकार है। जिला जज अंकुर जैन ने 29 अक्टूबर को यह आदेश जारी करते हुए कहा कि महिला के […] - [IPS officers deputation: CAPF में IPS अफसरों की संख्या घटाने का फैसला बरकरार… केंद्र को झटका](https://livelaworder.com/ips-officers-deputation-decision-to-reduce-the-number-of-ips-officers-in-capf-remains-intact-shock-to-center/): IPS officers deputation: शीर्ष अदालत ने कहा— ‘कैडर रिव्यू’ छह महीने में करें, कोई पुनर्विचार का आधार नहीं। छह महीने के भीतर कैडर रिव्यू करने का निर्देश केंद्र सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर पुनर्विचार से इनकार कर दिया है, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (deputation) घटाने और छह महीने के भीतर कैडर रिव्यू करने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति सूर्या कांत और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने केंद्र की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा कि 23 मई, 2025 के आदेश की […] - [Visually impaired aspirants: UPSC परीक्षा में स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर लगाने का फैसला…दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को राहत](https://livelaworder.com/decision-to-install-screen-reader-software-in-upsc-exam-for-visually-impaired-aspirants-relief-to-visually-impaired-candidates/): Visually impaired aspirants: सुप्रीम कोर्ट को आयोग ने जानकारी दी है कि अगले परीक्षा चक्र से शुरू हो सकता है सिस्टम। UPSC ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए अपनी परीक्षाओं में स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर लागू करने का फैसला किया है। आयोग ने कहा कि जैसे ही देशभर के परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित सॉफ्टवेयर और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो जाएगा, इस सुविधा को शुरू कर दिया जाएगा। यह जानकारी UPSC ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में दी। मामला सामाजिक संगठन मिशन […] - [Bar Election: पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल चुनाव 31 दिसंबर तक कराएं…सुप्रीम कोर्ट सख्त](https://livelaworder.com/bar-election-punjab-haryana-bar-council-elections-should-be-conducted-by-31-decembersupreme-court-is-strict/): Bar Election: बीसीआई को 10 दिन में नोटिफिकेशन जारी करने का आदेश, यूपी चुनाव 31 जनवरी तक पूरे हों। मतदाताओं की वास्तविक शिकायतों का निवारण हाे सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को 10 दिनों के भीतर पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल चुनावों की अधिसूचना जारी करने और 31 दिसंबर 2025 तक चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव 31 जनवरी 2026 तक पूरे किए जाएं और मतदाताओं की वास्तविक शिकायतों का निवारण किया जाए। यूपी में मतदाता […] - [Vernacular language: “मैं किसी सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानूंगा”…यूपी के कंधई थाने के SHO की टिप्पणी](https://livelaworder.com/vernacular-language-i-will-not-obey-the-order-of-any-supreme-courtcomment-of-sho-of-kandhai-police-station-of-up/): Vernacular language: कंधई थाने के प्रभारी ने कोर्ट आदेश की अवहेलना कर की गिरफ्तारी; सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ‘वर्दी के पीछे छिपकर न्याय व्यवस्था को दूषित नहीं किया जा सकता है। रवैया न्याय व्यवस्था के लिए “गंभीर खतरा” सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कंधई थाना प्रभारी गुलाब सिंह सोनकर पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिन्होंने अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर मारपीट की। कोर्ट ने कहा कि SHO का रवैया न्याय व्यवस्था के लिए “गंभीर खतरा” है और यह वर्दी की आड़ में न्याय को दूषित करने जैसा है।दरअसल, 28 […] - [Summoning Advocates: वकीलों को मनमाने तरीके से समन…याचिका न सुनना ‘अंतर्निहित शक्तियों का परित्याग’](https://livelaworder.com/summoning-lawyers-arbitrarily-summoning-lawyersnot-hearing-the-petition-abandonment-of-inherent-powers/): Summoning Advocates: सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को मनमाने ढंग से समन करने के खिलाफ दायर स्वत: संज्ञान लेतेम हुए मामले में शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। वकील की याचिका न सुनना एक स्पष्ट परित्याग सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी करते हुए गुजरात हाईकोर्ट की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। कहा, संवैधानिक अदालत होकर भी और इस दौरान गुजरात हाईकोर्ट की भूमिका पर सख्त नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट, संवैधानिक न्यायालय होने के बावजूद, जब एक वकील की याचिका सुनने से इनकार करता […] - [Succession Act: वसीयत निरस्तीकरण के कारण सीमित नहीं, न्यायालय तय करेगा ‘जस्ट कॉज’….यह रही बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/succession-act-is-not-limited-to-reasons-for-revocation-of-will-court-will-decide-just-cause-here-is-the-comment-of-bombay-high-court/): Succession Act: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, वसीयत निरस्तीकरण के कारण सीमित नहीं, न्यायालय तय करेगा ‘जस्ट कॉज’। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम पर हुई चर्चा हाईकोर्ट ने कहा, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 263 में वसीयत (Probate) रद्द या निरस्त करने के लिए दी गई स्पष्टीकरण (a) से (e) की सूची केवल उदाहरणात्मक (illustrative) है, पूर्ण (exhaustive) नहीं। यानी इन स्पष्टीकरणों में वर्णित कारणों के अलावा भी अन्य परिस्थितियां “जस्ट कॉज” (न्यायोचित कारण) मानी जा सकती हैं, जिनके आधार पर वसीयत रद्द की जा सकती है। इक्वाडोर में आत्महत्या वाले व्यक्ति की संपत्ति का मामला मामला एक ऐसे व्यक्ति की संपत्ति […] - [Bar News: स्टेट बार काउंसिल्स को चेतावनी… ₹750 से ज्यादा नामांकन शुल्क वसूला तो Contempt केस](https://livelaworder.com/bar-news-warning-to-state-bar-councils-contempt-case-if-enrollment-fee-is-more-than-%e2%82%b9-750/): Bar News: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की सभी राज्य बार काउंसिल्स को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के खिलाफ केस पर सुनवाई न्यायमूर्ति जे.बी. पर्डीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के खिलाफ दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका एक नवप्रवेशित विधि स्नातक ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि नामांकन प्रमाणपत्र लेने और अपने मूल शैक्षणिक दस्तावेज वापस पाने के लिए उससे ₹4,650 अतिरिक्त राशि मांगी गई। अदालत ने कहा, वे वकीलों से नामांकन शुल्क (Enrollment Fee) के रूप में ₹750 से […] - [Fire Insurance: आग लगने का कारण दावा खारिज करने का आधार नहीं…बीमा जोखिम प्रबंधन पर टिप्पणी](https://livelaworder.com/fire-insurance-the-reason-for-the-fire-is-not-a-basis-for-rejecting-the-claimcomment-on-insurance-risk-management/): Fire Insurance: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, फायर इंश्योरेंस (आग बीमा) जोखिम प्रबंधन, संपत्ति संरक्षण और आर्थिक स्थिरता का एक रणनीतिक उपकरण है। बीमा कंपनी के पक्ष में सुप्रीम फैसला न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने यह टिप्पणी ओरियन कॉनमर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए की। कंपनी ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ बीमा दावे की अस्वीकृति को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा, “जब यह साबित हो जाए कि नुकसान आग से हुआ है और न तो धोखाधड़ी का आरोप है, न बीमाधारक आग का प्रेरक है, तब आग का कारण अप्रासंगिक हो […] - [FIR Validation: एफआईआर रद्द करने की शक्ति बेहद सीमित मामलों में ही प्रयोग हो… इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त](https://livelaworder.com/fir-validation-the-power-to-cancel-fir-should-be-used-only-in-very-limited-cases-allahabad-high-court-is-strict/): FIR Validation: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, एफआईआर रद्द करने की शक्ति बेहद सीमित मामलों में ही प्रयोग हो। एफआईआर को चुनौती देनेवाले मामले पर सुनवाई न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें एक एफआईआर को यह कहते हुए चुनौती दी गई थी कि यह पहली एफआईआर के समान तथ्यों और आरोपों पर आधारित दूसरी एफआईआर है, जिसे दुर्भावनापूर्ण इरादे से मूल घटना के पांच वर्ष बाद दर्ज किया गया।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सूचना देने वाले शुभम अग्निहोत्री द्वारा उसी थाने में पहले दर्ज कराई गई […] - [Minorities case: संविधान अल्पसंख्यकों को विनियमन से छूट का अधिकार नहीं देता… इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/minorities-case-constitution-does-not-give-right-to-exemption-from-regulation-to-minorities-allahabad-high-courts-comment/): Minorities case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, संविधान अल्पसंख्यकों को विनियमन से छूट का अधिकार नहीं देता है। मदरसा अरबिया शम्सुल उलूम सिकारिगंज की याचिका पर सुनवाई मदरसा अरबिया शम्सुल उलूम सिकारिगंज (गोरखपुर) की प्रबंध समिति और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत मिलने वाला अधिकार राज्य सरकार द्वारा तय की गई उचित शैक्षणिक रूपरेखा और मानकों के भीतर ही प्रयोग किया जा सकता है। अदालत ने कहा, संविधान भले ही अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और संचालित करने का अधिकार देता है, लेकिन इस […] - [Divorced woman: तलाकशुदा या अलग रह रही मां ‘सिंगल पैरेंट’…यह रही गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/divorced-woman-divorced-or-separated-mother-single-parenthere-is-the-comment-of-gujarat-high-court/): Divorced woman: गुजरात हाईकोर्ट ने तलाकशुदा महिला की याचिका मंजूर की, कहा– बच्चों की कस्टडी मां के पास है, NOC की जरूरत नहीं है। मां के पास है बच्चों की कस्टडी गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को एक तलाकशुदा महिला की याचिका स्वीकार करते हुए उसके नाबालिग बच्चों के पासपोर्ट रिन्यू कराने की अनुमति दी, जिसे पासपोर्ट विभाग ने पिता की नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) न होने के आधार पर खारिज कर दिया था। जस्टिस एल. एस. पीरजादा की एकल पीठ ने कहा कि यह विवादित नहीं है कि मां और पिता के बीच तलाक हो चुका है, और आपसी समझौते […] - [Delhi HC: कोर्ट की कमिश्नर को पिस्तौल दिखाई…फिर यह हुई सजा, हैरान रह जाएंगे](https://livelaworder.com/showed-pistol-to-delhi-hc-court-commissioner-then-you-will-be-surprised-by-this-punishment/): Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, कोर्ट के आदेश में बाधा डालने की सोची-समझी कोशिश, माफ़ी सिर्फ दिखावा है। स्वत: संज्ञान (suo motu) में कार्यवाही की दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक व्यक्ति को कोर्ट द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर को पिस्तौल दिखाकर धमकाने के मामले में एक महीने की साधारण कैद और ₹2,000 जुर्माने की सजा सुनाई। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने आरोपी नितिन बंसल को आपराधिक अवमानना (criminal contempt) का दोषी ठहराया और उनके खिलाफ शुरू की गई स्वत: संज्ञान (suo motu) कार्यवाही निपटा दी। आरोपी को स्वेच्छा से सरेंडर करने के […] - [Maintenance Principles: पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण तय करने के नियम तय करें अदालतें…दिल्ली हाईकोर्ट](https://livelaworder.com/maintenance-principles-courts-should-decide-the-rules-for-determining-maintenance-of-wife-and-childdelhi-high-court/): Maintenance Principles: हाईकोर्ट ने कहा, बिना ठोस कारण और आय के आकलन के न दें मेंटेनेंस आदेश, जल्दबाजी से हो सकता है अन्याय। भरण-पोषण संबंधी आदेश कारण-सहित और तर्कसंगत दें दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण (मेंटेनेंस) तय करते समय अपनाए जाने वाले प्रमुख सिद्धांतों को स्पष्ट किया और राजधानी की फैमिली व महिला अदालतों को आदेश दिए कि वे भरण-पोषण संबंधी आदेश कारण-सहित और तर्कसंगत दें। जस्टिस स्वरना कांत शर्मा ने कहा कि वैवाहिक विवादों में दिए जाने वाले अंतरिम भरण-पोषण के आदेश अनुमान या अटकलों पर नहीं, बल्कि आय और परिस्थितियों के स्पष्ट आकलन पर आधारित […] - [Compensation Act: कर्मचारियों के मुआवजा कानून में ‘ आश्रित ’ की परिभाषा में संशोधन जरूरी…जाने अहम टिप्पणी](https://livelaworder.com/compensation-act-amendment-in-the-definition-of-dependent-in-the-employees-compensation-act-is-necessary-important-comments/): Compensation Act: सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 (Employees’ Compensation Act, 1923) में ‘आश्रित’ (dependent) की परिभाषा में संशोधन की सिफारिश की है। कानून आयोग (Law Commission of India) मामले में विचार और संशोधन करें अदालत ने कहा कि वर्तमान परिभाषा में ‘वयस्क विधवा बहन’ (major widowed sister) को मुआवजा पाने के अधिकार से बाहर रखा गया है, जो आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में “पुरानी और अव्यवहारिक” व्याख्या है। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि यह मुद्दा कानून आयोग (Law Commission of India) के पास विचार और संशोधन हेतु भेजा […] - [UP Judiciary: 17 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली कईयों को नौकरी…अंबेडकर नगर न्यायालय का मामला](https://livelaworder.com/up-judiciary-many-got-jobs-after-17-years-of-legal-battleambedkar-nagar-court-case/): UP Judiciary: सुप्रीम कोर्ट ने अंबेडकर नगर न्यायालय के 4 कर्मचारियों की बर्खास्तगी रद्द की, कहा, “2008 में किया गया निष्कासन अनुचित था। जिला न्यायालय में थे कार्यरत कक्षा-4 के चार कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिला न्यायालय में कार्यरत कक्षा-4 के चार कर्मचारियों की 2008 में की गई बर्खास्तगी को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि उन्हें विज्ञापित रिक्तियों से अधिक नियुक्त किए जाने के आधार पर हटाना गलत था। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की दो-न्यायाधीशीय पीठ ने कहा कि ऐसे नियुक्तियां नियम 12 के तहत वैध थीं, […] - [One-sided divorce decree: तलाक जैसे संवेदनशील मामलों में जल्दबाजी से फैसला देना न्याय के साथ अन्याय…पढ़ें मामला](https://livelaworder.com/one-sided-divorce-decree-giving-hasty-decision-in-sensitive-matters-like-divorce-is-injustice-to-justice-read-the-case/): One-sided divorce decree: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाणे के व्यक्ति का तलाक रद्द किया व कहा, ‘फैमिली कोर्ट ने बिना दिमाग लगाए, बेहद लापरवाही से फैसला सुनाया है। एकतरफा तलाक (Ex parte divorce decree) रद्द किया बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाणे के एक व्यक्ति को दिया गया एकतरफा तलाक (Ex parte divorce decree) रद्द कर दिया है, यह कहते हुए कि फैमिली कोर्ट ने बिना पर्याप्त कारण बताए और “कैजुअल व मैकेनिकल तरीके” से शादी को खत्म कर दिया था। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते देरे और संदेश डी. पाटिल की खंडपीठ ने यह आदेश उस अपील पर सुनाया, जिसे महिला ने नवंबर 2024 […] - [Encounter case: मणिपुर में 2009 के फर्जी मुठभेड़ केस… CBI की क्लोजर रिपोर्ट ठुकराई, 12 सुरक्षा कर्मियों पर चलेगा मुकदमा](https://livelaworder.com/encounter-case-2009-fake-encounter-case-in-manipur-cbis-closure-report-rejected-12-security-personnel-will-be-prosecuted/): Encounter case: मणिपुर की राजधानी इम्फाल की एक अदालत ने 2009 में दो नागरिकों की हत्या से जुड़े कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। “वास्तविक मुठभेड़” थी या “फर्जी एनकाउंटर”, चलेगा मुकदमा अदालत ने 12 सुरक्षा कर्मियों, जिनमें इम्फाल वेस्ट कमांडो यूनिट (CDO) और 39 असम राइफल्स के जवान शामिल हैं, को मुकदमे का सामना करने का आदेश दिया है।मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) सोरोखैबम सदानंद की अदालत ने माना कि आरोपियों पर IPC की धारा 302 (हत्या) और 34 (साझा आपराधिक इरादा) के तहत मामला बनता है। अदालत ने कहा […] - [Judicial officers: देशभर में न्यायिक अधिकारियों की वरिष्ठता के लिए एक समान मानक जरूरी… यह रही सुप्रीम टिप्पणी](https://livelaworder.com/judicial-officers-a-uniform-standard-is-necessary-for-the-seniority-of-judicial-officers-across-the-country-here-is-the-supreme-courts-comment/): Judicial officers: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, देशभर में निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की वरिष्ठता तय करने के लिए किसी तरह का एक समान राष्ट्रीय मानदंड (Uniform Criteria) जरूरी है, ताकि उनकी धीमी और असमान करियर प्रगति की समस्या को दूर किया जा सके। पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई मुख्य न्यायाधीश B R Gavai की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में दखल देना नहीं है, बल्कि न्यायिक सेवा में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करना है। पीठ में जस्टिस सूर्यकांत, विक्रम नाथ, के. विनोद चंद्रन […] - [Arms Act: वैध लाइसेंसधारी के पास कारतूस रखना अपराध नहीं…ट्रैवलर के पक्ष में दिया फैसला](https://livelaworder.com/arms-act-possession-of-cartridges-by-a-valid-license-holder-is-not-a-crimedecision-given-in-favor-of-the-traveller/): Arms Act: पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा, वैध लाइसेंसधारी के पास कारतूस रखना अपराध नहीं है। पुनरीक्षण याचिका (revision) को किया खारिज दिल्ली पुलिस की पुनरीक्षण याचिका (revision) को अदालत ने खारिज कर दिया है। उसे 2019 में आईजीआई एयरपोर्ट पर पांच जिंदा कारतूसों के साथ पकड़ा गया था। अदालत ने कहा कि आरोपी के पास वैध आर्म्स लाइसेंस था और उसकी ओर से कारतूसों का रखा जाना जानबूझकर नहीं था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) दीप्ति देवेश ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी गई थी। मजिस्ट्रेट ने […] - [Delhi High Court: लॉ रिसर्चरों को बड़ी राहत…अक्टूबर 2022 से बढ़ा वेतन देने का आदेश](https://livelaworder.com/delhi-high-court-big-relief-to-law-researchersorder-to-increase-salary-from-october-2022/): Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने यहां कार्यरत लॉ रिसर्चरों (Law Researchers) को बढ़ा हुआ मानदेय ₹80,000 प्रतिमाह की दर से 1 अक्टूबर 2022 से प्रभावी रूप से दिया जाए। लॉ रिसर्चरों ने दायर की थी याचिका न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश उन लॉ रिसर्चरों की याचिका पर दिया, जिन्होंने बढ़े हुए वेतन और बकाया राशि की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनके पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि यह घोषित किया जाता है कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अक्टूबर 2022 से प्रभावी रहेगा […] - [Delays in framing: देशभर में आरोप तय करने में हो रही देरी… सुप्रीम कोर्ट सख्त](https://livelaworder.com/delays-in-framing-there-is-a-delay-in-framing-of-charges-across-the-countrysupreme-court-is-strict/): Delays in framing: आपराधिक मामलों में आरोप तय करने में हो रही अत्यधिक देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायपालिका में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने बुधवार को कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए पूरे देश के लिए एक समान दिशा-निर्देश (Pan-India Guidelines) जारी करने की जरूरत है। कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सहायता मांगी है। अदालत ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी कई बार तीन से चार साल […] - [Criminal Proceeding: आपराधिक प्रक्रिया की ताकत संयम में भी निहित…भ्रष्टाचार मामले में बोला सुप्रीम कोर्ट](https://livelaworder.com/criminal-proceeding-the-strength-of-the-criminal-process-also-lies-in-restraintsupreme-court-said-in-the-corruption-case/): Criminal Proceeding: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आपराधिक प्रक्रिया की ताकत जितनी जांच-पड़ताल में है, उतनी ही संयम में भी है। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को किया रद्द अदालत ने यह टिप्पणी एक भ्रष्टाचार मामले में 1997 में आरोपी बनाए गए व्यक्ति की बरी होने की स्थिति बहाल करते हुए की। शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जुलाई 2011 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी करने के फैसले को पलटकर उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को एक साल की सज़ा सुनाई थी। […] - [Bar-Bench Case: न्यायपालिका का गरिमामय संचालन तभी संभव, जब बार-बेंच एक स्वर में काम करें](https://livelaworder.com/bar-bench-case-dignified-functioning-of-the-judiciary-is-possible-only-when-the-bar-bench-works-in-one-voice/): Bar-Bench Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अदालत का सुव्यवस्थित और गरिमामय संचालन न्यायपीठ (Bench) और बार (वकील समुदाय) के तालमेल और सामंजस्य से संभव है। उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब उसने उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका पर अपने 26 सितंबर के आदेश में की गई प्रतिकूल टिप्पणियां और 2 लाख रुपये का जुर्माना हटाने का निर्णय लिया। पीठ ने कहा कि जब अदालत अपनी राय स्पष्ट कर देती है और वकील से आगे बहस न करने का अनुरोध करती है, […] - [Seniority norms: निचली अदालतों में न्यायाधीशों के करियर ठहराव पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता... सुनवाई शुरू](https://livelaworder.com/seniority-norms-supreme-courts-concern-over-career-stagnation-of-judges-in-lower-courts-hearing-begins/): Seniority norms: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, देशभर में निचली अदालतों के न्यायाधीशों के करियर में “धीमी और असमान प्रगति” गंभीर चिंता का विषय है। वरिष्ठता तय करने के लिए समान राष्ट्रीय मानदंड तय होंगे शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायिक सेवा (Higher Judicial Service – HJS) कैडर में वरिष्ठता तय करने के लिए समान राष्ट्रीय मानदंड तय करने की प्रक्रिया पर सुनवाई शुरू की। संविधान पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई कर रहे हैं। पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी शामिल हैं। युवा वकील न्यायिक सेवा में शामिल होने में […] - [Permission Case: कर्नाटक सरकार को झटका…हाईकोर्ट ने एक आदेश पर लगाई रोक](https://livelaworder.com/permission-case-shock-to-karnataka-governmenthigh-court-stays-an-order/): Permission Case: सिद्धारमैया सरकार को कर्नाटक हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सार्वजनिक जगहों पर कार्यक्रम करने से पहले अनुमति का मामला कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ पीठ ने राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें निजी संगठनों को सरकारी संपत्ति या सार्वजनिक जगहों पर कार्यक्रम करने से पहले अनुमति लेना जरूरी बताया गया था। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार का यह आदेश नागरिकों के संविधान प्रदत्त अधिकारों—सभा और संगठन की स्वतंत्रता—का उल्लंघन करता है। अदालत ने आदेश पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई की तारीख 17 नवंबर तय की है। […] - [Domestic Violence: पति-पत्नी विवाद में पत्नी का दावा बढ़ा-चढ़ाकर करने का चलन…यह रही कोर्ट की फटकार](https://livelaworder.com/domestic-violence-the-practice-of-exaggerating-the-wifes-claim-in-husband-wife-dispute-this-is-the-courts-rebuke/): Domestic Violence: दिल्ली की एक अदालत ने घरेलू हिंसा कानून के तहत महिला द्वारा मांगी गई अंतरिम भरण-पोषण राशि की याचिका खारिज कर दी। दोनों पक्ष अपनी स्थिति को अपने पक्ष में पेश करने की कोशिश करते हैं अदालत ने कहा कि वैवाहिक विवादों में पत्नी द्वारा खर्चों का बढ़ा-चढ़ाकर दावा करने और पति द्वारा अपनी आय कम दिखाने की प्रवृत्ति देखी जाती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट पूजा यादव ने कहा, “कई फैसलों में यह देखा गया है कि जब पति-पत्नी के बीच विवाद होता है, तो दोनों पक्ष अपनी स्थिति को अपने पक्ष में पेश करने की कोशिश करते हैं […] - [Non-compliance of order: पंजाब DGP समेत 4 अफसरों पर ₹2 लाख जुर्माना…यह है मामला, पढ़ें](https://livelaworder.com/%e2%82%b9-2-lakh-fine-on-non-compliance-of-order-on-4-officers-including-punjab-dgp-read-the-matter/): Non-compliance of order: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने संशोधित (Modified) वाहनों पर कार्रवाई से जुड़े आदेश का पालन न करने पर पंजाब के डीजीपी गौरव यादव सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया है। पंजाब मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा होगी राशि जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने निर्देश दिया कि यह रकम चारों अधिकारियों के वेतन से बराबर हिस्से (₹50,000-₹50,000) में काटकर पंजाब मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराई जाए। जिन अन्य अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया है, उनमें आईएएस प्रदीप कुमार (सचिव, परिवहन विभाग), आईएएस मोनीश कुमार (राज्य परिवहन आयुक्त) और आईएएस जितेंद्र जोरवाल (उपायुक्त, संगरूर) शामिल […] - [Doctor's Care: अगर डॉक्टरों का ध्यान नहीं रखा तो समाज माफ नहीं करेगा…यह रही सुप्रीम टिप्पणी](https://livelaworder.com/doctors-care-if-doctors-are-not-taken-care-of-then-society-will-not-forgivehere-is-the-supreme-comment/): Doctor’s Care: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर न्यायपालिका डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का साथ नहीं देगी, तो समाज हमें माफ नहीं करेगा। बीमा कंपनियां वैध दावे निपटाएं अदालत ने यह टिप्पणी उन डॉक्टरों और हेल्थ वर्कर्स को बीमा लाभ से बाहर रखने के खिलाफ सुनवाई के दौरान की, जिन्होंने निजी क्लीनिकों, डिस्पेंसरी और गैर-मान्यता प्राप्त अस्पतालों में कोविड ड्यूटी करते हुए अपनी जान गंवाई थी। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा कंपनियां वैध दावे निपटाएं, और यह धारणा गलत है कि निजी डॉक्टर केवल लाभ कमाने के […] - [Bahrain IC: गौरव…भारत की सीनियर एडवोकेट पिंकी आनंद बनीं बहरीन इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट की जज](https://livelaworder.com/bahrain-ic-gauravindias-senior-advocate-pinky-anand-becomes-judge-of-bahrain-international-commercial-court/): Bahrain IC: भारत की वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डॉ. पिंकी आनंद को बहरीन इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट (BICC) की जज नियुक्त किया गया है। यह अदालत 5 नवंबर 2025 को औपचारिक रूप से लॉन्च होगी यह अदालत 5 नवंबर 2025 को औपचारिक रूप से लॉन्च की जाएगी। पिंकी आनंद भारतीय न्यायिक जगत का एक बड़ा नाम हैं, जिनका कानूनी करियर चार दशकों से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने 2014 से 2020 तक भारत सरकार में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के रूप में कार्य किया और कई अहम संवैधानिक व अंतरराष्ट्रीय मामलों में देश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने भारत, […] - [MINORS PROPERTIES: नाबालिग अपने नाम की संपत्ति की अवैध बिक्री रद्द करने पर यह उठा सकते हैं कदम… सुप्रीम कोर्ट ने दी नई शक्ति](https://livelaworder.com/minors-can-take-these-steps-to-cancel-illegal-sale-of-property-in-their-name-supreme-court-gives-new-power/): MINORS PROPERTIES: नाबालिग के नाम से संपत्ति के लेनदेन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए उन्हें मुकदमा किए बगैर अस्वीकृत करने की शक्ति दी है। बालिग होने पर संपत्ति लेनदेन को मुकदमे के जरिए रद्द करवाना संभव: अदालत यह फैसला 7 अक्टूबर को जस्टिस पंकज मित्तल और प्रसन्ना बी. वरले की पीठ ने के. एस. शिवप्पा बनाम के. नीलेम्मा मामले में सुनाया। कहा, अगर किसी नाबालिग की संपत्ति उसके अभिभावक ने अदालत की अनुमति लिए बिना बेच दी हो, तो वह व्यक्ति बालिग होने पर केवल मुकदमा दायर करके ही नहीं, बल्कि अपने स्पष्ट […] - [CJI APPOINTMENT: नए CJI की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू, जस्टिस सूर्यकांत बनेंगे देश के अगले मुख्य न्यायाधीश](https://livelaworder.com/cji-appointment-process-of-appointment-of-new-cji-started-justice-surya-kant-will-become-the-next-chief-justice-of-the-country/): CJI APPOINTMENT: केंद्र सरकार ने गुरुवार को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) की नियुक्ति प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। उत्तराधिकारी का नाम सुझाने के लिए पत्र भेजा जाएगा मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई आगामी 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कानून मंत्रालय की ओर से जस्टिस गवई को उनके उत्तराधिकारी का नाम सुझाने के लिए पत्र शुक्रवार तक भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ी तय परंपरा के तहत की जा रही है। मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश […] - [COMPENSATION Case: 23 साल की कानूनी लड़ाई के बाद विधवा को मिला हक… सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता को ढूंढ निकाला, पढ़ें पूरी खबर](https://livelaworder.com/compensation-case-widow-got-her-rights-after-23-years-of-legal-battlesupreme-court-found-the-victim-read-full-news/): COMPENSATION Case: एक विधवा के लिए जो 2002 में ट्रेन हादसे में अपने पति को खो चुकी थी, सुप्रीम कोर्ट ने मानवीयता की मिसाल पेश की। दानापुर इंटरसिटी से गिरकर पति की हुई थी मौत शीर्ष अदालत ने खुद यह सुनिश्चित किया कि उसे रेलवे से उसका हक का मुआवजा मिले, वो भी 23 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद। यह मामला सयनोक्ता देवी का है। जिनके पति विजय सिंह ने 21 मार्च 2002 को भागलपुर-दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से बख्तियारपुर से पटना जाने के लिए वैध टिकट लिया था। लेकिन ट्रेन में भीड़ ज़्यादा होने की वजह से वह […] - [POSCO Act: फिजिकल रिलेशन’ शब्द का इस्तेमाल भर से रेप साबित नहीं होता…यह रही दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/posco-act-mere-use-of-the-word-physical-relation-does-not-prove-rape-here-is-the-comment-of-delhi-high-court/): POSCO Act: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, किसी भी मामले में सिर्फ ‘फिजिकल रिलेशन’ (शारीरिक संबंध) शब्द का इस्तेमाल करने से रेप साबित नहीं होता है। पॉक्सो के मामले में आरोपी की सजा रद्द यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने एक मामले में दी, जिसमें एक व्यक्ति को धारा 376 आईपीसी और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत 10 साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने उसकी सजा रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। कहा कि दुष्कर्म के लिए सबूत या स्पष्ट विवरण चाहिए। सिर्फ शारीरिक संबंध कह देना बलात्कार (रेप) या गंभीर यौन शोषण (aggravated penetrative […] - [Cheque Bounce: समय-सीमा पार कर्ज को जारी चेक बाउंस…धारा 138 के तहत मामला संभव, पढ़ें आदेश](https://livelaworder.com/check-bounce-check-bounce-issued-for-loan-beyond-the-time-limitcase-possible-under-section-138-read-order/): Cheque Bounce: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा, समय-सीमा अगर कर्ज पार भी कर जाए तो भी चेक बाउंस होने पर एनआई एक्ट के तहत मामला बनेगा। यह रहा हाईकोर्ट का अहम निर्देश हाईकोर्ट के जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की एकल पीठ ने अहम फैसला देते हुए कहा, अगर कोई व्यक्ति समय-सीमा (time-barred debt) पार कर चुके कर्ज के लिए चेक जारी करता है और वह चेक डिशऑनर (बाउंस) हो जाता है, तो भी उसके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दायित्व (liability) बनता है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 25(3) के तहत, […] - [Seniority designation:  76 वकील बने सीनियर एडवोकेट…हर साल 10 मुफ्त लीगल एड केस लड़ेंगे](https://livelaworder.com/seniority-designation-76-lawyers-become-senior-advocateswill-fight-10-free-legal-aid-cases-every-year/): Seniority designation: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं की नई सूची जारी कर 76 वकीलों को “सीनियर एडवोकेट” के रूप में नामित किया है। नि:शुल्क न्यायिक सहायता उपलब्ध कराना भी प्रक्रिया का उद़्देश्य अदालत द्वारा जारी अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि सूची में शामिल सभी सीनियर एडवोकेट्स को हर साल कम से कम 10 लीगल एड केस मुफ्त (pro bono basis) में लड़ने होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को नि:शुल्क न्यायिक सहायता उपलब्ध कराना और न्याय तक सबकी समान पहुंच सुनिश्चित करना है। सूत्रों के अनुसार, इन 76 सीनियर एडवोकेट्स […] - [WIFE BELONGINGS: 2022 से झगड़े बाद पत्नी को कपड़े तक नहीं लेने दिए…सुप्रीम कोर्ट ने कहा-यह कैसी बेशर्मी है](https://livelaworder.com/wife-belongings-2022-after-a-fight-the-wife-was-not-even-allowed-to-take-clothessupreme-court-said/): WIFE BELONGINGS: सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति को उसकी अलग रह रही पत्नी का सारा सामान 24 घंटे के भीतर लौटाने का आदेश दिया है। पति ने अदालत में लगाई थी अर्जी शीर्ष कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “बेहद शर्मनाक” है कि पति ने 2022 से अब तक पत्नी को अपने कपड़े और जरूरी सामान तक लेने की इजाजत नहीं दी। यह मामला उस वक्त सामने आया जब पति ने अदालत में अर्जी लगाई कि दीवाली के दिन उनके नाबालिग बेटे को घर आने की अनुमति दी जाए, ताकि पूरा परिवार मिलकर पूजा कर सके। इस […] - [Unhygienic washroom: देशभर के कोर्ट परिसरों में गंदे शौचालय… सुप्रीम कोर्ट में आई रिपोर्ट](https://livelaworder.com/unhygienic-washroom-dirty-toilets-in-court-premises-across-the-country-report-in-supreme-court/): Unhygienic washroom: देशभर के अदालत परिसरों में शौचालयों की बदहाल और गंदी स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक स्थिति रिपोर्ट दायर की गई। मेट्रो शहरों की हाईकोर्ट्स में भी दशा बेहतर नहीं दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्थिति न्यायाधीशों, वकीलों, वादकारियों और कर्मचारियों, सभी के मौलिक अधिकारों और गरिमा के अधिकार का लगातार उल्लंघन है। मेट्रो शहरों की हाईकोर्ट्स में भी शौचालयों की दुर्दशा कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और फंड आवंटन, रखरखाव अनुबंधों और जवाबदेही की कमी को दर्शाती है। मौजूदा बुनियादी ढांचा आधुनिक और समावेशी सार्वजनिक सुविधा के मानकों पर […] - [UP Conversion Act: UP में ‘जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन’ के केस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला…कई FIR रद्द](https://livelaworder.com/big-decision-of-the-supreme-court-on-the-case-of-forced-religious-conversion-in-up-conversion-act-many-firs-canceled/): UP Conversion Act: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ‘जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन’ को लेकर दर्ज कई एफआईआर को खारिज कर दिया है। एफआईआर पूरी तरह अविश्वसनीय सामग्री” पर आधारित यह फैसला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनाया, जो यूपी अनाधिकार धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 और IPC के तहत दर्ज कई मामलों की सुनवाई कर रही थी। सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी (SHUATS) के वाइस-चांसलर डॉ. राजेंद्र बिहारी लाल और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थीं। अदालत ने कहा कि ये एफआईआरें “पूरी तरह अविश्वसनीय सामग्री” पर आधारित थीं और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग थीं। पीड़ित […] - [Website Launch: ऑल असम जजेस एसोसिएशन का आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च](https://livelaworder.com/website-launch-official-website-launch-of-all-assam-judges-association/): Website Launch: सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्जल भूयां ने ऑल असम जजेस एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट का उद्घाटन किया। KBR ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम कॉटन यूनिवर्सिटी के KBR ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में न्यायमूर्ति भूयां ने “Judicial Professionalism, Etiquette and Expectations from Judicial Officers” विषय पर विशेष व्याख्यान भी दिया। न्यायपालिका की साख पर जोर भूयां ने कहा कि जनता का न्यायिक प्रणाली में विश्वास अडिग रहना चाहिए। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को बिना बाहरी दबाव के निष्पक्ष निर्णय देने, पेशेवर ईमानदारी बनाए रखने और सार्वजनिक जीवन में संयम रखने की सलाह दी। “न्यायपालिका कभी किसी प्रकार का अनुचित लाभ देती […] - [Pak News: पाक पीएम शहबाज शरीफ और सीएम मरियम नवाज के खिलाफ फंड दुरुपयोग का मामला…होगी सुनवाई](https://livelaworder.com/pak-news-fund-misuse-case-against-pak-pm-shehbaz-sharif-and-cm-maryam-nawazhearing-will-be-held/): Pak News: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ के खिलाफ सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप में लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने दायर की याचिका यह याचिका इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की नेता अलिया हमजा ने दाखिल की है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि शहबाज और मरियम के खिलाफ व्यक्तिगत प्रचार के लिए सरकारी खजाने से अरबों रुपये खर्च करने के मामले में कार्रवाई की जाए। संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन बताया गया याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि शरीफ परिवार के दोनों नेता करदाताओं […] - [EXECUTION PETITIONS: गरीब बंदियों की जमानत रकम भुगतान की SOP में बदलाव किया…सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/execution-petitions-change-in-the-sop-for-payment-of-bail-amount-of-poor-prisonerssupreme-courts-comment/): EXECUTION PETITIONS: सुप्रीम कोर्ट ने गरीब विचाराधीन कैदियों (Undertrial Prisoners) की जमानत राशि के भुगतान को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में अहम बदलाव किए हैं। डालसा के माध्यम से रकम होंगी जमा जस्टिस एम. एम. सुंदरश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा के सुझावों को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। अब राज्य सरकारें डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (डालसा) के माध्यम से यह रकम जमा कर सकेंगी। अब बनेगी जिला स्तरीय कमेटी कोर्ट ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट लेवल एम्पावर्ड कमेटी (DLEC) बनाई जाएगी, जिसमें […] - [Irregularities in the recruitment process: यूपी के एक केस पर सुप्रीम टिप्पणी… बेहद असाधारण हालात में दें सीबीआई जांच के आदेश](https://livelaworder.com/irregularities-in-the-recruitment-process-supreme-comments-on-a-case-in-up-order-cbi-investigation-in-extremely-extraordinary-circumstances/): Irregularities in the recruitment process: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद सचिवालयों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है। बिना किसी ठोस सबूत या पक्षकारों की मांग के CBI जांच का आदेश दे दिया जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपनी सीमा से आगे जाकर लंबित अपील को स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) जनहित याचिका में बदल दिया और बिना किसी ठोस सबूत या पक्षकारों की मांग के CBI जांच का आदेश दे दिया। अदालत ने कहा, […] - [Negligence in food service: फ्लाइट में खाने में बाल मिला…फिर यह कहा मद्रास हाईकोर्ट ने](https://livelaworder.com/negligence-in-food-service-hair-found-in-food-on-flight-then-madras-high-court-said-this/): Negligence in food service: एयर इंडिया की फ्लाइट में परोसे गए खाने में बाल मिलने के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने एयरलाइन को यात्री को 35 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। गलती कैटरिंग कंपनी पर थोपने की कोशिश की। जस्टिस पी.बी. बालाजी की सिंगल बेंच ने कहा कि एयरलाइन अपने ठेकेदारों के काम के लिए भी विकेरियस लाइबिलिटी (परिहारक जिम्मेदारी) से बच नहीं सकती। अदालत ने कहा कि कंपनी लापरवाह रही और उसने अपनी गलती कैटरिंग कंपनी पर थोपने की कोशिश की। कोलंबो से चेन्नई की उड़ान में मिला बाल यह मामला 26 जून 2002 का है, जब […] - [Criminalise Match fixing: मैच फिक्सिंग अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा BCCI](https://livelaworder.com/bcci-reaches-supreme-court-to-criminalise-match-fixing-is-match-fixing-a-crime-or-not/): Criminalise Match fixing: क्रिकेट में मैच फिक्सिंग को अपराध माना जाए या नहीं, इस सवाल पर अब सुप्रीम कोर्ट फैसला करेगा। सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर कर्नाटक प्रीमियर लीग (KPL) से जुड़े मैच फिक्सिंग मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला स्टेट ऑफ कर्नाटक बनाम श्री अबरार काज़ी एंड अदर्स शीर्षक से चल रहा है, जो 2018 और 2019 सीजन की फिक्सिंग से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने कहा था – फिक्सिंग ‘आपराधिक अपराध’ नहीं कर्नाटक पुलिस ने खिलाड़ियों, टीम मालिक, क्रिकेट अधिकारी और एक बुकी पर […] - [Genesis of incident: 48 साल बाद होगा ट्रायल! गर्लफ्रेंड पर किया था चाकू से हमला, आरोपी अब 81 साल का](https://livelaworder.com/genesis-of-incident-trial-to-be-held-after-48-years-accused-who-attacked-girlfriend-with-knife-now-81-years-old/): Genesis of incident: 48 साल पहले अपनी गर्लफ्रेंड पर चाकू से हमला करने के आरोपी को आखिरकार ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। 81 वर्षीय चंद्रशेखर माधुकर कालेकर को जमानत मुंबई सत्र न्यायालय ने 81 वर्षीय चंद्रशेखर माधुकर कालेकर को जमानत दे दी है, जो 1977 से फरार था। पुलिस के अनुसार, 23 साल की उम्र में कालेकर ने अपनी गर्लफ्रेंड पर शक करते हुए उस पर चाकू से वार किया था। उस वक्त उसे हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जमानत मिलने के बाद वह दोबारा कोर्ट में पेश नहीं हुआ। चार दशक तक फरार, […] - [Alarming Delay: न्याय में देरी न्याय से इनकार…क्यूं दी सुप्रीम कोर्ट ने नई डेडलाइन](https://livelaworder.com/alarming-delay-delay-in-justice/): Alarming Delay: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में 8.8 लाख से ज्यादा लंबित एक्जीक्यूशन पेटिशनों (डिक्री लागू करने वाली याचिकाओं) पर सख्त नाराजगी जताई है। न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल कोर्ट ने कहा कि अगर डिक्री के बाद हकदार को सालों इंतजार करना पड़े, तो यह “न्याय की विफलता और न्याय का मजाक” है। जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और पंकज मित्तल की बेंच ने Periyammal बनाम V. Rajamani केस की सुनवाई के दौरान कहा, अगर डिक्री पास होने के बाद भी उसे लागू करने में सालों लगेंगे, तो यह न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल है। यह न्याय नहीं, […] - [Domestic Violence Act: शादी के बाद ससुराल में रहने वाला घर ‘शेयर्ड हाउसहोल्ड’, बहू को वहीं रहने का हक](https://livelaworder.com/domestic-violence-act-shared-household-the-daughter-in-law-has-the-right-to-live-in-the-in-laws-house-after-marriage/): Domestic Violence Act: ‘शेयर्ड हाउसहोल्ड’ (साझा गृह) को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का बेहद अहम फैसला माना जा रहा है, इसमें माता-पिता के अस्वीकार के बाद की स्थिति स्पष्ट की गई है। सिर्फ कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए ही पत्नी को निकालना संभव दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, अगर कोई पत्नी शादी के तुरंत बाद अपने पति और ससुराल वालों के साथ जिस घर में रहती है, वही उसका ‘शेयर्ड हाउसहोल्ड’ (साझा गृह) माना जाएगा। ऐसे में, भले ही बाद में पति को उसके माता-पिता ने ‘डिसओन’ (अस्वीकार) कर दिया हो, पत्नी को उस घर में रहने का पूरा अधिकार रहेगा। जस्टिस संजयव […] - [Loan Case: पब्लिक मनी पर लापरवाही…यूनियन बैंक को फटकार, ‘जिम्मेदार अफसर की सैलरी से वसूलें ₹25 हजार’](https://livelaworder.com/loan-case-negligence-on-public-money-union-bank-reprimanded-recover-%e2%82%b9-25-thousand-from-the-salary-of-the-responsible-officer/): Loan Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को एक लोन रिकवरी केस में लापरवाही बरतने पर कड़ी फटकार लगाई है। केस को दोबारा बहाल करने की इजाजत दे दी कोर्ट ने कहा कि बैंक ने “बेपरवाही और सुस्ती” दिखाई, जिससे मामला बार-बार टलता रहा और आखिर में खारिज हो गया। हालांकि, कोर्ट ने यह देखते हुए कि मामला पब्लिक मनी से जुड़ा है, केस को दोबारा बहाल करने की इजाजत दे दी, लेकिन ₹25 हजार जुर्माने के साथ। जस्टिस गिरीश कठपालिया की बेंच ने कहा, “यह समझ से परे है कि बैंक के कानून अधिकारी या मैनेजर ने […] - [Right to travel:पासपोर्ट प्राधिकरण पर बॉम्बे हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी…पढ़ें पूरा मामला](https://livelaworder.com/right-to-travel-bombay-high-courts-big-comment-on-passport-authorityread-the-whole-matter/): Right to travel: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि यात्रा करने का अधिकार संविधान के तहत प्रत्येक व्यक्ति को प्रदत्त एक मौलिक अधिकार है। 76 वर्षीय शरद खातू के मामले में की सुनवाई न्यायमूर्ति एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी 76 वर्षीय शरद खातू के मामले में की, जिनका पासपोर्ट नवीनीकरण/पुनः जारी करने का आवेदन पुलिस पोर्टल पर दर्ज एक गलत प्रविष्टि के आधार पर पासपोर्ट प्राधिकरण ने अस्वीकार कर दिया था। उस प्रविष्टि में दर्शाया गया था कि उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है। कोर्ट ने कहा, यात्रा करने के अधिकार को […] - [VULGAR MESSAGES: महिला सहकर्मी को अश्लील संदेश भेजना अनुचित आचरण…यह रही हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी](https://livelaworder.com/vulgar-messages-sending-obscene-messages-to-a-female-colleague-is-inappropriate-conducthere-is-the-strict-comment-of-the-high-court/): VULGAR MESSAGES: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी विवाहित वर्दीधारी अधिकारी द्वारा किसी अन्य महिला के साथ संबंध रखना और उसे अश्लील संदेश भेजना “वर्दीधारी बल के अधिकारी के लिए अनुचित आचरण (unbecoming of an officer)” है। CISF के उप-निरीक्षक पर लगाए गए दंड को बरकरार रखा न्यायालय ने यह टिप्पणी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक उप-निरीक्षक पर लगाए गए दंड को बरकरार रखते हुए की, जिस पर एक महिला सहकर्मी को अशोभनीय संदेश भेजने और फोन पर परेशान करने का आरोप था। न्यायमूर्ति सुभ्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता […] - [Witnesses Hostile: SC ने कहा- मामूली फर्क पर गवाह को hostile कहना गलत](https://livelaworder.com/witnesses-hostile-sc-said-it-is-wrong-to-call-witnesses-hostile-on-minor-differences/): Witnesses Hostile: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गवाह के बयान में मामूली अंतर या विरोधाभास आने पर उसे “शत्रुतापूर्ण (Hostile)” घोषित करना गलत प्रथा है। अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करें अदालत जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि अदालतें धारा 154 (अब 157, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023) के तहत अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल “सावधानी और अपवादस्वरूप परिस्थितियों” में ही करें। अदालत ने कहा कि यह कदम सिर्फ तभी उठाया जाना चाहिए, जब गवाह पूरी तरह से अभियोजन के केस से पलट जाए, झूठ बोले या खुली शत्रुता दिखाए। कोर्ट बोली — “अक्सर बिना वजह गवाहों को hostile […] - [Pakistan link: “कानून से ऊपर कोई नहीं…DRI अफसर ने हद की, माल के पाकिस्तानी कनेक्शन पर यह टिप्पणी](https://livelaworder.com/pakistan-link-no-one-is-above-the-lawdri-officer-crossed-the-limit-with-this-comment-on-pakistani-connection-of-goods/): Pakistan link: बॉम्बे हाईकोर्ट ने राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के एक अफसर को जमकर फटकार लगाई है। कस्टम से क्लियर हो चुके दो कंटेनर जबरन वापस बुला लिए हाईकोर्ट ने कस्टम से क्लियर हो चुके दो कंटेनर जबरन वापस बुला लिए। मामला 56 टन सूखे खजूरों (Dry Dates) के आयात का है, जिन्हें दुबई से मंगाया गया था, लेकिन DRI को शक था कि माल पाकिस्तान से आया है। कोर्ट ने कहा, अफसर ने पूरी तरह अनदेखी की कानूनी आदेशों की है। जस्टिस एम.एस. सोनक और अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि DRI अधिकारी ने कस्टम्स एक्ट की धारा […] - [Marital dispute: सुप्रीम कोर्ट की सलाह…पत्नी को पति के इर्द-गिर्द नहीं घूमना चाहिए, दोनों अपने बच्चों के लिए अहं छोड़ें](https://livelaworder.com/marital-dispute-supreme-courts-advice-wife-should-not-hang-around-her-husband-both-should-leave-ego-for-their-children/): Marital dispute:सुप्रीम कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी को पति के इर्द-गिर्द घूमने की ज़रूरत नहीं है मध्यस्थता (mediation) के जरिए अपने मतभेद सुलझाएं जस्टिस बी.वी. नागरथना और आर. महादेवन की बेंच ने दंपती को सलाह दी कि वे मध्यस्थता (mediation) के जरिए अपने मतभेद सुलझाएं और बच्चों की भलाई को प्राथमिकता दें। कहा, दंपति को अपने बच्चों के भविष्य के लिए अहं को किनारे रखकर एक-दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए। 2018 में हुई शादी, अब अलग रह रहे हैं दोनों मामले में पति दिल्ली में रेलवे में कार्यरत हैं, जबकि पत्नी […] - [ Career stagnation: सुप्रीम कोर्ट ने तय की तारीख…निचली अदालतों के जजों की प्रमोशन और सीनियरिटी पर सुनवाई 28 अक्टूबर से](https://livelaworder.com/career-stagnation/):  Career stagnation: निचली न्यायपालिका के जजों के प्रमोशन में ठहराव को लेकर अहम सुनवाई अब शुरू हो जाएगी। पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला दिया सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली न्यायपालिका के जजों की करियर स्टैग्नेशन (प्रमोशन में ठहराव) और सीनियरिटी तय करने के नियमों पर अब 28 अक्टूबर से सुनवाई शुरू होगी। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता में गठित पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला दिया। किन मुद्दों पर होगी सुनवाई 27 अक्टूबर तक सभी पक्षों को लिखित दलीलें देनी होंगी पीठ में जस्टिस सूर्यकांत, विक्रम नाथ, के. विनोद चंद्रन और जॉयमाल्या बागची […] - [ Shoe at a judge: अहमदाबाद कोर्ट में जज पर फेंका जूता, आरोपी को जज ने खुद छोड़ा](https://livelaworder.com/shoe-at-a-judge/): Shoe at a judge: फैसले से नाराज़ शख्स ने सुनवाई के दौरान किया हंगामा करके जज पर जूता फेंक दिया था। अहमदाबाद की सेशंस कोर्ट में हुआ मामला सेशंस कोर्ट में मंगलवार को उस समय हंगामा मच गया जब एक शख्स ने फैसले से नाराज़ होकर जज पर जूता फेंक दिया। घटना अहमदाबाद की सेशंस कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान हुई। जज ने कहा — कार्रवाई मत करो करंज पुलिस थाने के इंस्पेक्टर पी.एच. भाटी ने बताया कि आरोपी व्यक्ति खुद उस केस में अपीलकर्ता था। अपील खारिज होने पर वह गुस्से में आ गया और जूता फेंक दिया। […] - [SHELTER HOMES RELOCATION: दिल्ली में बेघर लोगों के पुनर्वास की कोई जगह नहीं बची… यह रही NALSA की रिपोर्ट](https://livelaworder.com/shelter-homes-relocation-there-is-no-place-left-for-rehabilitation-of-homeless-people-in-delhi-here-is-the-report-of-nalsa/): SHELTER HOMES RELOCATION: DMRC के निर्माण कार्य के चलते शेल्टर होम्स के स्थानांतरण पर रिपोर्ट पेश किया गया। शहरी बेघरों को वैकल्पिक जगहों पर शिफ्ट करने का मामला राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि दिल्ली में शहरी बेघरों को वैकल्पिक जगहों पर शिफ्ट करने की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि जिन शेल्टर होम्स को पुनर्वास स्थल के रूप में प्रस्तावित किया गया था, वे पहले से ही अधिकतम क्षमता तक भरे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त को NALSA को निर्देश दिया था कि वह DMRC के […] - [Live cases dashboard: सरकार की पैरवी पर अब “लाइव” नज़र](https://livelaworder.com/live-cases-dashboard-now-a-live-look-at-the-governments-lobbying/): Live cases dashboard: कानून मंत्रालय ने लॉन्च किया Live Cases Dashboard, 7.23 लाख मुकदमों की रियल टाइम ट्रैकिंग। पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम कानून मंत्रालय ने मंगलवार को Live Cases Dashboard लॉन्च किया है, जिससे अब सरकार से जुड़े मुकदमों की निगरानी रियल टाइम में की जा सकेगी। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे “पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम” बताया। यह है यह डैशबोर्ड? यह डैशबोर्ड Legal Information Management and Briefing System (LIMBS) का हिस्सा है — एक डिजिटल प्लेटफॉर्म जो केंद्र सरकार से जुड़े मुकदमों को देशभर की अदालतों और ट्रिब्यूनल्स […] - [Temple fund: मंदिरों के चढ़ावे का पैसा अब सरकारी कामों में नहीं लगेगा… यह रहा हिमाचल हाईकोर्ट का फरमान](https://livelaworder.com/temple-fund-the-money-offered-in-temples-will-no-longer-be-used-for-government-purposes-here-is-the-order-of-himachal-high-court/): Temple fund: अदालत ने कहा, मंदिर फंड केवल देवता, मंदिर और सनातन धर्म के लिए, सरकार नहीं कर सकती इस्तेमाल। भक्त जो दान देते हैं, वह देवता के नाम पर देते हैं हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि मंदिरों के चढ़ावे या दान की रकम का इस्तेमाल किसी भी सरकारी योजना या गैर-धार्मिक काम में नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि भक्त जो दान देते हैं, वह देवता के नाम पर देते हैं, न कि सरकार के लिए। “हर रुपया देवता का, सरकार का नहीं” न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति राकेश […] - [Rat attack: नवजात काे चूहे ने काटा… अब मौत के मामले में एमपी सरकार देगी जवाब](https://livelaworder.com/rat-attack-newborn-was-bitten-by-a-rat-now-mp-government-will-answer-in-case-of-death/): Rat attack: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नवजात का चूहों के काटने से हुई मौत को लेकर कार्रवाई और मुआवजे की मांग पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। एक पिता ने मामले में याचिका दायर की दरअसल, एक पिता ने मामले में याचिका दायर की थाी। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने धार ज़िले के निवासी देवराम द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश दिया और छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा। राज्य सरकार के अलावा, महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) के अधीक्षक, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, इंदौर के डीन और एचएलएल इंफ्रा टेक सर्विसेज लिमिटेड […] - [SP CUSTODY: फर्रुखाबाद एसपी पर सख्ती…गिरफ्तार वकील को पेश करने तक कोर्ट में रहने का आदेश](https://livelaworder.com/sp-custody-strictness-on-farrukhabad-sporder-to-remain-in-court-till-production-of-arrested-lawyer/): SP CUSTODY: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता के वकील की गिरफ्तारी पर कड़ी नाराजगी जताई। व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का अादेशा अदालत ने फर्रुखाबाद की पुलिस अधीक्षक (एसपी) आरती सिंह को निर्देश दिया कि जब तक गिरफ्तार अधिवक्ता को कोर्ट में पेश नहीं किया जाता, वे अदालत कक्ष से बाहर नहीं जाएंगी। अदालत ने एसपी सिंह को व्यक्तिगत हलफनामा (personal affidavit) दाखिल करने का भी आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई बुधवार को तय की। मामला क्या है न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और संजय कुमार की खंडपीठ यह आदेश प्रीति यादव द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस (हिरासत से मुक्ति) याचिका […] - [Tenant's Case: किरायेदार मकान मालिक के स्वामित्व से इनकार नहीं कर सकता…यह रही दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी](https://livelaworder.com/tenants-case-tenant-cannot-deny-ownership-of-landlordhere-is-the-comment-of-delhi-high-court/): Tenant’s Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, कोई भी किरायेदार, किरायेदारी अवधि के दौरान मकान मालिक के स्वामित्व (टाइटल) को नकार नहीं सकता, भले ही जालसाजी (forgery) के आरोप लगाए गए हों। यह किसी ‘विवाद योग्य मुद्दे’ (triable issue) का आधार नहीं बनता न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति शैल जैन की खंडपीठ ने कहा, “एक बार जब किरायेदार को मकान में प्रवेश दे दिया जाता है, तो वह किरायेदारी के जारी रहने तक मकान मालिक के स्वामित्व से इनकार नहीं कर सकता। यहां तक कि जालसाजी के आरोप लगाए जाने की स्थिति में भी, यदि कोई ठोस साक्ष्य या अन्य […] - [Patna HC: 40 बोतल कोडीन कफ सिरप मिला ताे लगेगा NDPS एक्ट…पटना हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के निर्देश](https://livelaworder.com/patna-hc-40-bottle-code-cuff-syrup-was-found-ndps-act-instructions-of-patna-high-court-single-bench/): Patna HC: पटना हाईकोर्ट की सिंगल बेंच जस्टिस जितेंद्र कुमार ने 27 अगस्त 2025 को कोडीन युक्त 40 बोतल कफ सिरप के पकड़े जाने पर NDPS एक्ट लागू करने का निर्देश दिया। आरोपी की जमानत याचिका किया खारिज हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने ऐसे ही एक मामले में पकड़े गए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि जब्ती की गई दवा व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) में आती है और इस पर NDPS एक्ट, 1985 सख्ती से लागू होता है। क्या है मामला? एसएसबी को सूचना मिली थी कि एक चारपहिया वाहन नेपाल में नशीली दवाइयां ले […] - [SC News: रोस्टर में बदलाव का हवाला…जमानत याचिका को पहले के जज के पास न भेजना अनुचित, यह है मामला](https://livelaworder.com/sc-news-refer-for-change-in-roster-it-is-unfair-to-not-send-bail-plea-to-the-earlier-judge/): SC News: सुप्रीम कोर्ट ने एक हाईकोर्ट जज की आलोचना की है, जिन्होंने नियमित जमानत अर्जी को उस जज के पास भेजने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने पहले इसी एफआईआर में अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की थी। चीफ जस्टिस के अधिकार पर हुई चर्चा जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने इस रवैये को अनुचित ठहराते हुए कहा कि यह केवल संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का अधिकार है कि किसी मामले को किस बेंच को सौंपा जाए। अदालत ने कहा कि यदि इस तरह का कारण दर्ज किया जाए तो यह संदेश जाता है कि […] - [Bail Matter: स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी, पर पीड़ितों की पीड़ा पर आंखें मूंदना ठीक नहीं…क्यों रही सुप्रीम टिप्पणी](https://livelaworder.com/bail-matter-protecting-freedom-is-necessary-but-not-right-to-blind-the-suffering-of-victims-why-is-supreme-comment/): Bail Matter: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जहां एक ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा महत्वपूर्ण है, वहीं अदालतों को पीड़ितों की पीड़ा पर “आंखें मूंद” नहीं लेनी चाहिए। मार्च 2024 के पटना हाईकोर्ट का आदेश रद्द जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मार्च 2024 के पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें हत्या के एक मामले के दो आरोपियों को अग्रिम जमानत दी गई थी। शीर्ष अदालत ने इस मामले को जिस जल्दबाजी में हाईकोर्ट ने निपटाया, उस पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता, […] - [Bail orders: न्यायिक अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जाए….सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर कही बड़ी बात](https://livelaworder.com/special-training-should-be-given-to-bail-orders-judicial-officers-supreme-court-said-a-big-thing-on-bail/): Bail orders: सुप्रीम कोर्ट ने ठगी के एक मामले में आरोपियों को मिली जमानत रद्द करते हुए एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (ACMM) और सेशन जज की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। कम से कम सात दिन का विशेष न्यायिक प्रशिक्षण लेने का आदेश शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर वह इस तरह से दी गई जमानत पर आंख मूंद लेती तो अपने कर्तव्य से चूक जाती। कोर्ट ने माना कि मामले के तथ्यों को देखते हुए इन आदेशों को पारित करने वाले न्यायिक अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण लेना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर सुनवाई […] - [Day-To-Day Trial: संवेदनशील मामलों में फिर से रोजाना सुनवाई की परंपरा लागू हो…सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश](https://livelaworder.com/day-to-day-trial-sensitive-cases-the-tradition-of-daily-hearing-should-be-applicable-supreme-courts-big-direction/): Day-To-Day Trial:सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विशेष रूप से संवेदनशील मामलों में रोजाना (day-to-day) ट्रायल की परंपरा, जो लगभग 30 साल पहले तक चलन में थी, अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और अदालतों को इस पर वापस लौटना चाहिए। मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने के लिए एक समिति गठित करें न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा, त्वरित न्याय का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित है और इसके लिए सभी हाईकोर्ट्स को अपनी-अपनी जिला न्यायपालिका के लाभार्थ इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने हेतु एक समिति गठित करनी चाहिए। पीठ ने अपने […] - [Hindu Succession Act: हिंदू समाज की मौजूदा संरचना को नीचा मत दिखाइए…हम आपको सावधान कर रहे हैं](https://livelaworder.com/the-hindu-succession-act-do-not-let-the-current-structure-of-hindu-society-look-down-we-are-cautioning-you/): Hindu Succession Act: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की कुछ धाराओं पर लगी चुनौतियों की सुनवाई में सावधानीपूर्वक आगे बढ़ेगा। यह रही अदालत की टिप्पणी अदालत ने कहा कि उसे इस बात का ध्यान रखना होगा कि हिंदू समाज की मौलिक संरचना और सिद्धांत, जो हजारों सालों से चले आ रहे हैं, को झटका न लगे। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें 1956 के अधिनियम की उत्तराधिकार संबंधी कुछ धाराओं को चुनौती दी गई है। पीठ ने कहा, हिंदू समाज की मौजूदा संरचना को […] - [Triple Talaq: तीन तलाक मामले में आरोपियों पर कार्यवाही पर रोक…इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती](https://livelaworder.com/triple-talaq-prohibits-action-on-the-accused-in-the-triple-talaq-case-allahabad-high-court-shown-strictness/): Triple Talaq: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन तलाक़ मामले में आरोपितों के ख़िलाफ़ आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है और विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी किया है। आवेदक शिया मुस्लिम समुदाय से हैं न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान इस मामले में दाख़िल याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। यह याचिका शाहिद रज़ा और दो अन्य ने दाख़िल की है, जिसमें उन्होंने पूरी कार्यवाही रद्द करने तथा 22 जून 2024 की आरोपपत्र (चार्जशीट) और 10 जुलाई 2025 के समन आदेश को निरस्त करने की मांग की है, जिसे अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जारी किया था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील […] - [FOSTER CARE: 6 साल से कम उम्र के बच्चों को फोस्टर केयर में नहीं रखा जाएगा…सरकार ने किया स्पष्ट](https://livelaworder.com/foster-care-children-below-6-years-of-age-will-not-be-kept-in-foster-care-government-clarified/): FOSTER CARE: केंद्र सरकार ने कहा, छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को फोस्टर केयर (पालक देखभाल) में नहीं भेजा जाएगा। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने किया स्पष्टीकरण केंद्र सरकार ने हाल ही में नियमों की अलग-अलग व्याख्या को लेकर उठी आशंकाओं के बाद यह स्पष्टीकरण दिया गया है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने कार्यालय ज्ञापन जारी कर स्पष्ट किया कि जेजे रूल्स की नियम 23(3) और मॉडल फोस्टर केयर गाइडलाइंस 2024 के मुताबिक केवल 6 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चे ही फोस्टर केयर के पात्र होंगे। कारा ने चेतावनी दी कि इससे कम […] - [BAR ELECTION: 31 जनवरी 2026 तक कराएं स्टेट बार काउंसिल चुनाव…वरना कड़े कदम SC कड़े कदम उठाएगा](https://livelaworder.com/bar-election-should-be-done-by-31-january-2026-state-bar-council-elections-otherwise-sc-will-take-strict-steps/): BAR ELECTION: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, देशभर की राज्य बार काउंसिलों के चुनाव 31 जनवरी 2026 तक हर हाल में कराए जाएं, वरना अदालत खुद हस्तक्षेप कर रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की देखरेख में चुनाव कराने पर मजबूर होगी। दशकों से चुनाव नहीं होने पर कोर्ट नाराज जस्टिस सूर्या कांत, उज्जल भूयां और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि एलएलबी सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन चुनाव टालने का बहाना नहीं हो सकता। कोर्ट ने नाराज़गी जताई कि दशकों से चुनाव नहीं हो रहे, जबकि लोकतांत्रिक संस्था में समय पर चुनाव जरूरी हैं। वेरिफिकेशन ड्राइव में फर्जी डिग्रियां और अपराधियों का वकील बनकर […] - [Judges Vacancy: जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति…देश में 5 हजार पद खाली](https://livelaworder.com/judges-vacancy-appointment-of-district-judges-5-thousand-posts-vacant-in-the-country/): Judges Vacancy: सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि देशभर में जिला न्यायपालिका के करीब 25,870 स्वीकृत पदों में से लगभग 5,000 पद अब भी खाली हैं। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्ष में चल रही सुनवाई मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पाोच जजों की संविधान पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही है कि क्या वे न्यायिक अधिकारी, जिन्होंने बेंच पर आने से पहले सात साल तक वकालत की है, बार कोटे से जिला न्यायाधीश नियुक्ति के पात्र माने जा सकते हैं। पीठ में न्यायमूर्ति एम. एम. सुन्दरश, अरविंद कुमार, एस. सी. शर्मा और के. विनोद चंद्रन भी शामिल हैं। […] - [Bar Body: वकील के खिलाफ निरर्थक शिकायत स्वीकार किया… बार काउंसिल पर 50 हजार का जुर्माना](https://livelaworder.com/bar-body-accepted-fruitless-complaint-against-lawyer-fines-of-50-thousand-on-bar-council/): Bar Body: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केवल किसी हलफनामे का सत्यापन (अटेस्टेशन) करने मात्र से कोई अधिवक्ता उस हलफनामे की सामग्री का पक्षकार नहीं हो जाता। वकील के खिलाफ निरर्थक (फ्रिवोलस) शिकायत को स्वीकार कर लिया अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल (BCMG) पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया, क्योंकि उसने एक वकील के खिलाफ निरर्थक (फ्रिवोलस) शिकायत को स्वीकार कर लिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि बार काउंसिल द्वारा शिकायत दर्ज करने का निर्देश देना और उसे अनुशासन समिति के पास जांच के लिए भेजना अवैध था और “विकृत” (perversity) की श्रेणी में […] - [ JUDGES PERFORMANCE: कुछ हाईकोर्ट जज अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहे, क्यों बिफरा सुप्रीम कोर्ट](https://livelaworder.com/judges-performance/):  JUDGES PERFORMANCE: सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि कुछ हाईकोर्ट जज अपने कार्यों को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। हाईकोर्ट के जजों के लिए “स्कूल प्रिंसिपल” की तरह काम नहीं करना चाहते: सुप्रीम जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की खंडपीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के जजों के लिए “स्कूल प्रिंसिपल” की तरह काम नहीं करना चाहती, लेकिन एक स्व-प्रबंधन व्यवस्था (self-management system) होनी चाहिए ताकि “फाइलें उनकी मेज पर पड़ी न रह जाएं।” अदालत ने कहा, उनके प्रदर्शन मूल्यांकन (performance evaluation) की आवश्यकता है। पीठ ने कहा, कुछ जज दिन-रात काम करते हैं […] - [ SARFAESI ACT: नीलामी नोटिस प्रकाशित होने के बाद उधारकर्ता संपत्ति रिडीम नहीं कर सकते…सुप्रीम आदेश](https://livelaworder.com/sarfaesi-act/):  SARFAESI ACT: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, SARFAESI Act (Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002) के तहत नीलामी नोटिस प्रकाशित होने के बाद उधारकर्ता अपनी संपत्ति वापस नहीं ले सकते। 2002 में लागू SARFAESI कानून का उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा करना था अदालत ने कहा, क्योंकि बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा जारी सेल सर्टिफिकेट से खरीदारों को अटल अधिकार (indefeasible rights) मिल जाते हैं। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि 2002 में लागू SARFAESI कानून का उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा करना था, […] - [AI CRASH PROBE: अहमदाबाद में विमान हादसा…जांच पूरी हाेने दीजिए, तब बताएंगे लापरवाही किसकी…यह रही सुप्रीम टिप्पणी](https://livelaworder.com/ai-crash-probe-aircraft-accident-in-ahmedabad-let-the-investigation-be-completed-then-who-will-tell-negligence-this-is-the-supreme-comment/): AI CRASH PROBE: सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून को हुए एयर इंडिया विमान हादसे पर पायलट काे दाेषी ठहराने से बचने की सलाह दी। अदालत ने एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर गौर किया अदालत ने कहा, एएआईबी (Aircraft Accident Investigation Bureau) की प्रारंभिक रिपोर्ट के कुछ पहलुओं को पायलटों की लापरवाही बताना “गैरजिम्मेदाराना” है। इस दाैरान स्वतंत्र, निष्पक्ष व शीघ्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) को नोटिस जारी किया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की खंडपीठ ने 12 जुलाई को जारी एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर गौर किया। एनजीओ सेफ्टी […] - [Delhi HC: पति-पत्नी के रिश्ते में कोई डाले दरार... तीसरे व्यक्ति पर करें "Alienation of Affection" का केस…यह है तरीका](https://livelaworder.com/delhi-hc-husband-and-wife-in-the-relationship-of-husband-and-wife-make-a-crack-on-the-third-person-alienation-of-affection/): Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, यदि कोई तीसरा व्यक्ति जानबूझकर और गलत तरीके से किसी विवाह में हस्तक्षेप कर पति-पत्नी के रिश्ते में दरार डालता है, तो पीड़ित जीवनसाथी उस व्यक्ति पर हर्जाने का दावा कर सकता है। यह कहा हाईकोर्ट ने अदालत ने इस नए कानूनी सिद्धांत को “Alienation of Affection” (स्नेह से वंचित करना) के रूप में स्वीकार किया है। ऐसा दावा सिविल कोर्ट में दायर किया जा सकता है, न कि फैमिली कोर्ट में। इसमें पीड़ित को यह साबित करना होगा कि प्रतिवादी ने जानबूझकर और गलत आचरण किया, उसके कारण वैवाहिक संबंध प्रभावित हुआ, और […] - [FIR Format: पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी की जाति लिखना तुरंत बंद करे यूपी सरकार…इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया आदेश](https://livelaworder.com/in-fir-format-police-records-the-up-government-should-immediately-stop-writing-the-caste-of-the-accused-allahabad-high-court-ordered/): FIR Format: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी की जाति दर्ज करने की प्रथा को तुरंत रोका जाए। शराब तस्करी से जुड़े मामले पर सुनवाई अदालत ने इस प्रथा को कानूनी भ्रांति और संवैधानिक नैतिकता को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया, जो संवैधानिक लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है। यह आदेश जस्टिस विनोद दिवाकर ने शराब तस्करी से जुड़े एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान 16 सितंबर को दिया। पुलिस रिकॉर्ड से हटें जाति कॉलम अदालत ने कहा कि एफआईआर, जब्ती मेमो और अन्य दस्तावेजों में आरोपी, मुखबिर या गवाह […] - [NI ACT: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला…चेक की रकम और नोटिस में अंतर घातक, केस होगा खारिज](https://livelaworder.com/ni-act-supreme-courts-big-decision-difference-in-check-amount-and-notice-will-be-fatal-case-rejected/): NI ACT: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, चेक बाउंस मामलों में अगर चेक की रकम और नोटिस में लिखी रकम अलग हो तो पूरा मामला ही कानूनी तौर पर खत्म हो जाएगा। नोटिस की शर्तों का सख्ती से पालन होना जरूरी है चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस एन.वी. अंजरिया की बेंच ने कहा कि एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत केस तभी बनता है जब नोटिस में वही रकम मांगी जाए जो चेक में लिखी है। कोर्ट ने इसे “फैटल” (घातक) करार दिया। कोर्ट की टिप्पणी, “डिमांड नोटिस, जिसमें चेक की रकम मांगी जाती है, धारा 138 के अपराध […] ## Pages - 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